सरसों (Brassica spp.) एक प्रमुख तिलहन फसल है, जिसे रबी मौसम में उगाया जाता है। यह मुख्य रूप से तेल के लिए उगाई जाती है। भारत में सरसों की खेती उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत में व्यापक रूप से की जाती है।
🌾 1. सरसों की प्रमुख किस्में (Varieties of Mustard)
सरसों की कई किस्में हैं, जो क्षेत्र और मौसम के अनुसार उपयुक्त होती हैं,वही किस्में हमें लगानी चाहिए
कुछ प्रमुख varieties जो लगातार बढ़िया उत्पादन दे रही हैं और जिन्हें किसान लगातार प्रयोग कर रहे हैं वे निम्नलिखित हैं
3 Kamadgiri 1233
4 Advanta 414
5 Pioneer 45S46
🌱 2. मौसम और समय (Sowing Time)
- बुवाई का उपयुक्त समय:
- उत्तर भारत में: अक्टूबर के मध्य से नवंबर के पहले सप्ताह तक
- अधिक देर से बुवाई करने पर पैदावार में कमी आ सकती है।
- तापमान:
- बुवाई के समय: 20–25°C
- फसल के विकास के समय: 10–25°C
🌍 3. भूमि की तैयारी (Soil & Land Preparation)
- भूमि का चयन:
- बलुई दोमट मिट्टी जिसमें अच्छी जल निकासी हो, सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
- pH 6.0–7.5
- भूमि तैयारी:
- 1–2 जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से
- फिर 2-3 बार देशी हल या रोटावेटर से जुताई
- पाटा लगाकर मिट्टी भुरभुरी करें
🌾 4. बीज की मात्रा व उपचार (Seed Rate & Treatment)
- बीज मात्रा:
- पंक्तियों में बुवाई: 2.5-5 किग्रा/हेक्टेयर
- छिटकवां बुवाई: 2.5-6 किग्रा/हेक्टेयर
- बीज उपचार:
- फफूंदनाशक से उपचार:
- कार्बेन्डाजिम या थिरम 2.5 ग्राम/किग्रा बीज
- रोग/कीट रोकथाम हेतु जैविक उपचार:
- ट्राइकोडर्मा विरिडे 5 ग्राम/किग्रा बीज
- फफूंदनाशक से उपचार:
🚜 5. बुवाई की विधि (Sowing Method)
- पंक्ति से पंक्ति दूरी: 30 सेंटीमीटर
- पौधे से पौधे की दूरी: 10–15 सेंटीमीटर
- गहराई: 2–3 सेमी
💧 6. सिंचाई (Irrigation)
- पहली सिंचाई: बुवाई के 20–25 दिन बाद (फूल आने से पहले)
- दूसरी सिंचाई: फली बनने के समय
- सरसों को 2–3 सिंचाई पर्याप्त होती हैं
- सिंचाई को सिर्फ आवश्यकतानुसार करें
अधिक पानी या जलभराव से बचें — इससे जड़ गलन और पैदावार में गिरावट होती है।
🌿 7. उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Management)
उर्वरक का नाम मात्रा (हेक्टेयर में) नाइट्रोजन (N) 60 किग्रा फास्फोरस (P) 40 किग्रा पोटाश (K) 20 किग्रा सल्फर (S) 20 किग्रा
- खाद का समय: बुवाई के समय बेसल डोज के रूप में
🐛 8. रोग और कीट नियंत्रण (Pests & Diseases)
प्रमुख रोग:
- सफेद रतुआ (White Rust):
- नियंत्रण: मेन्कोजेब 0.2% का छिड़काव
- पत्ती झुलसा (Alternaria Blight):
- नियंत्रण: थायोफेनेट मिथाइल या क्लोरोथालोनिल का छिड़काव
प्रमुख कीट:
- एफिड (Aphids):
- नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड या थायमेथॉक्साम का छिड़काव
- सुंडी नियंत्रण प्रोफेनोफोस साइपर या ctpr का छिड़काव
🔪 9. कटाई और उपज (Harvesting & Yield)
- कटाई का समय: जब पौधों की 75-80% फलियाँ पक जाएँ (पीली हो जाएँ)
- उपज:
- सामान्यतः 15–20 क्विंटल/हेक्टेयर
- अच्छी देखरेख में 25–30 क्विंटल/हेक्टेयर तक
📌 अतिरिक्त सुझाव:
बुवाई के समय
सरसो की बुवाई के समय डीएपी की जगह NPK 12:32:16,10:26:26 या 20:20:0:13 50-100 kg प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग करने से अधिक लाभ प्राप्त होगा
इसके साथ ही फिप्रोनिल 0.6% 4kg, micorrhiza 4kg प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग करना चाहिए
इसके बाद 15-20 दिन पर एक कीटनाशक के साथ seaweed या NPK का स्प्रे करने से पत्ते चौड़े व पौधे का विकास अच्छा होता है
पानी लगाने से पहले खेत में थोड़े यूरिया के साथ फिस्तुरा+TPM का छिट्टा मारने से पौधा स्वस्थ रहता है
सरसों जब 60-70 दिन की हो तब उत्तम प्रणाम 250ml/acre एवम श्रीराम एलेक्सी 250ml/acre तथा भारत पेले 100gm/acre लगाने से फसल रोगमुक्त व अधिक वजनदार होगी
- फसल चक्र अपनाएं – सरसों को दलहनी फसलों या धान के बाद लें।
- खरपतवार नियंत्रण करें – बुवाई के 20–25 दिन बाद निंदाई-गुड़ाई करें।
- पौध संरक्षण पर विशेष ध्यान दें – समय-समय पर खेत का निरीक्षण करें।

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